Saturday, December 8, 2012

रोज शाम नित्य मै आकर ,मधुशाला में शीश झुकाउंगा !! 589-593 589 मधु तुम्हे पाने की बेताबी दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है ! कभी तो लबो से पिलाओगी हाला ,इस उम्मीद में शामे ढलती ही जा रही है !! 590 मेरे प्यासे दिल का मधुर अरमान हो तुम ,मेरा जिस्म मेरी जान हो तुम !! मधुशाला 2 दो मेरा ह्रदय ,पथिक मनोहर की अमित पहचान हो तुम !! 591 अपना सब कुछ छोड़ा मैंने ,प्यार तेरा पा जाऊँगा ! रोज शाम नित्य मै आकर ,मधुशाला में शीश झुकाउंगा !! 592 मेरे पल पल का साथ तुम्ही तुम ,मेरे जीवन की दिन और रात तुम्ही तुम ! मेरे जीवन का शुभ प्रभात तुम्ही तुम ,मेरी मौत की सौगात तुम्ही तुम !! 593 मधु तुमने सारे सारे जग पर छाकर , सबको अपना दीवाना बनाया ! रात्री में दिवा स्वप्न दिखाकर ,एक नया संसार बसाया !!



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मधु तुम हाला हो मधुरतम ,मधुशाला की ,मधु तुम यौवन रस का छलकता प्याला !
मधु तुम्हारा यौवन रस पीने को , बेताब और बेचेन लग रहा सारा जहाँ मतवाला !!
585
सारे जग को बनाया दिवाना तुमने , यौवन के छलकते जाम का !
हमको भी अपना दीवाना बना लो , सागर मय से जाम पिलाकर !!
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बेताबी अब बढ़ती जा रही है ,मंजिल असंभव नज़र रही है
जितना प्रयास पथिक है करता , प्यास बढ़ती ही जा रही है !!
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मधु आओ बैठो पास मेरे तुम ,अपने अधरों से जाम पिलादो !
अपनी महक से जीवन महकाकर ,अपना यौवन नाम मेरे कर दो !!
588
एक पल नहीं ,एक दिन नहीं ,एक बरस नहीं ,सौ साल नहीं !
जनम -जनम का साथ तुम लिख दो ,मधुशाला तुम नाम मेरे लिख दो !!

रोज शाम नित्य मै आकर ,मधुशाला में शीश झुकाउंगा !! 589-593

589

मधु तुम्हे पाने की बेताबी दिन दिन बढ़ती ही जा रही है !

कभी तो लबो से पिलाओगी हाला ,इस उम्मीद में शामे ढलती ही जा रही है !!

590

मेरे  प्यासे दिल का  मधुर अरमान हो तुम ,मेरा जिस्म मेरी जान हो तुम !!

 मधुशाला 2 दो मेरा ह्रदय ,पथिक मनोहर की अमित पहचान हो तुम !!

591

अपना सब कुछ छोड़ा मैंने ,प्यार तेरा पा जाऊँगा !

रोज शाम नित्य मै आकर ,मधुशाला में शीश झुकाउंगा !!

592

मेरे पल पल का साथ तुम्ही तुम ,मेरे जीवन की दिन और रात तुम्ही तुम !

मेरे जीवन का शुभ प्रभात तुम्ही तुम ,मेरी मौत की सौगात तुम्ही तुम !!

593

मधु तुमने सारे सारे जग  पर छाकरसबको अपना दीवाना बनाया !

 रात्री में दिवा स्वप्न दिखाकर ,एक नया संसार बसाया !!   

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