Sunday, December 9, 2012

अमृत सरोवर की स्वर्ण कमल कुमुदनी ..................

अमृत सरोवर की स्वर्ण कमल कुमुदनी ..................

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तुम क्या जानो तुम कितनी सुन्दर हो ,यौवन रस से लबरेज मधुर कलि हो तुम !
अमृत सरोवर की स्वर्ण कमल कुमुदनी ,चंचल कोमल ,अल्हड अलबेली सुरबाला !!
600
तुम देवलोक की अप्सरा हो या कोई परी ,या देवलोक की अनुपम सागर मय !
तुम्हे छूने की जरुरत ही नहीं , तुम्हे देखकर ही सारे जग को नशा हो जाता है !!
601
तुम्हे पाने की तमन्ना दिल में सजोए ,सारा जहां बैठा है !
कौन हूँ मै क्या नाम है मेरा ,हम तो ये भी भुला बैठे है !!
602
मधु के कर से पीकर हाला ,झूम रहा है मन मतवाला !
कल फिर आऊंगा मधुशाला ,छक के पियूँगा मै हाला !!

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