Sunday, December 9, 2012

रोज शाम नित्य मै आकर ,मधुशाला में शीश झुकाउंगा !! 589-593


589

मधु तुम्हे पाने की बेताबी दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है !

कभी तो लबो से पिलाओगी हाला ,इस उम्मीद में शामे ढलती ही जा रही है !!

590

मेरे  प्यासे दिल का  मधुर अरमान हो तुम ,मेरा जिस्म मेरी जान हो तुम !!

 मधुशाला 2 दो मेरा ह्रदय ,पथिक मनोहर की अमित पहचान हो तुम !!

591

अपना सब कुछ छोड़ा मैंने ,प्यार तेरा पा जाऊँगा !

रोज शाम नित्य मै आकर ,मधुशाला में शीश झुकाउंगा !!

592

मेरे पल पल का साथ तुम्ही तुम ,मेरे जीवन की दिन और रात तुम्ही तुम !

मेरे जीवन का शुभ प्रभात तुम्ही तुम ,मेरी मौत की सौगात तुम्ही तुम !!

593

मधु तुमने सारे सारे जग  पर छाकर , सबको अपना दीवाना बनाया !

 रात्री में दिवा स्वप्न दिखाकर ,एक नया संसार बसाया !!   

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