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मधु तुम्हारे गुण बयां करते है ,मधुशाला के छलकते हुए पैमाने !
सागर मय से छलकती नित्य है , देवलोक की अमृत हाला !!
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तुम्ही मेरा सन्देश जहाँ को ,तुम्ही पथिक का अनुपम प्यार !
तुम्ही सागर मय की अनुपम हाला ,तुम्ही सुरलोक की अमृत धार !!
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तुम यौवन रस का अमृत कलश मनोरम ,सोमरस का छलकता हुआ प्याला हो !
मेघदूत की शकुंतला तुम ,मनु की श्रंगी और श्रुति ,देवलोक की सुरबाला हो !!
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मधु तुम नन्ही कलि कुमुदनी ,मै अलबेला अल्हड भंवर निराला हूँ !
नन्ही कलि को फूल बनाता ,नाच दिखाता गाता ,गुनगुनाता मै मतवाला !1
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तुम हाला का छलकता प्याला ,स्वर्ग लोक की सुन्दर सुरबाला !
चूल तुम्हारे मेघ स्याह काले ,जैसे सावन में घने मेघ अम्बर में डेरा डाले !!
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