मधुशाला में खनक रहे थे प्याले , झूम रहे थे मुसाफिर मतवाले !
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पैमानों से टकराए पैमाने ,जामों के दौर पे दौर चले !
सुरा सुन्दर सागर मय मधुशाला में , बगैर पैरों के भाग रही थी !!
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मेरी डगर निहार रही थी सुरबाला ,पुरे सोलह श्रंगार किये !
मै पथिक सुनसान डगर पे ,मधुशाला की ओर कदम बढाता हौले हौले !!
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सुर सुंदरी ,सागर मय और मधुशाला , राही मदमस्त और मतवाला !
सोम रस पीकर खो जाता , सारे जग की चिंता से वह मुक्त हो जाता !!
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मधुशाला में खनक रहे थे प्याले , झूम रहे थे मुसाफिर मतवाले !
साकी बलायें घूम रही थी , लेकर कर में छलकते प्याले !!
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एक प्याला गिरा और टूट गया , यार मेरा क्यों रूठ गया !
दिल फिर यार का टूट गया , साथ साथ हमारा छुट गया !!
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