Sunday, December 9, 2012

मधुशाला में खनक रहे थे प्याले , झूम रहे थे मुसाफिर मतवाले !

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पैमानों से टकराए पैमाने ,जामों के दौर पे दौर चले !

सुरा सुन्दर सागर मय मधुशाला में , बगैर पैरों के भाग रही थी !!

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मेरी डगर निहार रही थी सुरबाला  ,पुरे सोलह श्रंगार किये !

मै पथिक सुनसान डगर पे ,मधुशाला की ओर कदम बढाता हौले हौले !!

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सुर सुंदरी ,सागर मय और मधुशाला , राही मदमस्त और मतवाला !

सोम रस पीकर खो  जाता , सारे जग की चिंता से वह मुक्त हो जाता !!

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मधुशाला में खनक रहे थे प्याले , झूम रहे थे मुसाफिर मतवाले !

साकी बलायें घूम रही थी , लेकर कर में छलकते प्याले !!

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एक प्याला गिरा और टूट गया , यार मेरा क्यों रूठ गया !

दिल फिर यार का टूट गया , साथ साथ हमारा छुट गया !!

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