Friday, December 7, 2012

हौले हौले प्यार से सहलाकर मुझको अपने दामन में समा लेती हो !


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हौले हौले प्यार से सहलाकर मुझको अपने दामन में समा लेती हो !

पथिक मनोहर अनजान की थकान मिटाकर ,नई स्फुर्ती ,उमंग जगाती हो !!

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तुम्हारे जिस्म के स्पर्स मात्र से ही ,शरीर में बिजली सी कौंध जाती है !

शरीर पर छा जाता है जुनून तुम्हारा ,दीवानों की सी हालत हो जाती है !!

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तुम्हारे जिस्म की महक से ही ,पटियाला पैग का नशा हो जाता है !

तुम्हारे लबो को छू लेने के अहसास से ही ,माथे पे पसीना आ जाता है !!

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तुम्हारे लबो को लबो से छू लू ,जन्नत की सैर हो जाएगी !

दिल की मुराद तुम पूरी कर दो ,चाहे मेरी जिंदगी ले लो !!

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तुमसे रौशन जहाँ है सारा ,तुम्ही से रौशन है मधुशाला !

कमर मेतुम्हारी सागर मय है ,कर में छलकता मय का प्याला !!

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