579
हौले हौले प्यार से सहलाकर मुझको अपने दामन में समा लेती हो !
पथिक मनोहर अनजान की थकान मिटाकर ,नई स्फुर्ती ,उमंग जगाती हो !!
580
तुम्हारे जिस्म के स्पर्स मात्र से ही ,शरीर में बिजली सी कौंध जाती है !
शरीर पर छा जाता है जुनून तुम्हारा ,दीवानों की सी हालत हो जाती है !!
581
तुम्हारे जिस्म की महक से ही ,पटियाला पैग का नशा हो जाता है !
तुम्हारे लबो को छू लेने के अहसास से ही ,माथे पे पसीना आ जाता है !!
582
तुम्हारे लबो को लबो से छू लू ,जन्नत की सैर हो जाएगी !
दिल की मुराद तुम पूरी कर दो ,चाहे मेरी जिंदगी ले लो !!
583
तुमसे रौशन जहाँ है सारा ,तुम्ही से रौशन है मधुशाला !
कमर मेतुम्हारी सागर मय है ,कर में छलकता मय का प्याला !!
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