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| आँखों |
सारा जहाँ है आशिक तुम्हारा
, कबतलक खुद को बचाओगे तुम !
मेरे दिल को अपना कुटीर बना लो , यही रहकर खुद को बचा पाओगी तुम !!
पथिक मनोहर रस्ता निहारे , और कबतलक तडपाओगे तुम !!
अब तो यौवन भी ढलने लगालगा
है , और कितना इनतजार करवाओगे
तुम
बहुत बोलती है ये नज़रे तुम्हारी , इनपे भला काबू तुम पाओगी कैसे !
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