301
तुम्हे तुम्हारी नजरो से बचाकर मैंने , तुम्ही को तुमसे चुरा लिया है !
कोई और जगह नहीं मिलने पर , तुम्हे अपने दिल की मलिका बना लिया है !!
302
अपने दिल का कैदी बनाकर ,लबो से जाम पिला दिया है !
अब तुम दूर जाओगी कैसे , नज़रो का पहरा लगा दिया है !!
303
अब दूर जाओगे कैसे , दिल का मेहमाँ बना लिया है !
तुम्हारी साँसों की आहट को जानम , हमारी साँसे जानती है !!
304
गुलिस्तां के फूल जानते है , हर कली पहचानती है !
राज तुम्हारे दिल का ओ जानम , हमारे दिल ने जान लिया है !!
305
जब देखते है हम आइना , हमारी जगह तुम्हारी छवि नजर आती है !
सुबह होने से पहले जानम , सांझ की बेला दिखाई दे जाती है !
No comments:
Post a Comment