Friday, December 7, 2012

301

तुम्हे  तुम्हारी नजरो से बचाकर मैंने , तुम्ही को तुमसे चुरा लिया है !

कोई और जगह नहीं मिलने पर , तुम्हे अपने दिल की मलिका बना लिया है !!

302

अपने दिल का कैदी बनाकर ,लबो से जाम पिला दिया है !

अब तुम दूर जाओगी कैसे , नज़रो का पहरा लगा दिया है !!

303

अब दूर जाओगे कैसे , दिल का मेहमाँ बना लिया है !

तुम्हारी साँसों की आहट को जानम , हमारी साँसे जानती है !!

304

गुलिस्तां के फूल जानते है , हर कली पहचानती है !

राज तुम्हारे दिल का ओ जानम , हमारे दिल ने जान लिया है !!

305

जब देखते है हम आइना , हमारी जगह तुम्हारी छवि नजर आती है !

सुबह होने से पहले जानम , सांझ की बेला दिखाई दे जाती है !

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